हाल ही में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कुछ वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें अभिनेता अक्षय कुमार को एक फ़िल्म ट्रेलर में महर्षि वाल्मीकि की भूमिका निभाते हुए दिखाया गया है। पहली नज़र में ये वीडियो वास्तविक प्रतीत हो सकते हैं, लेकिन अक्षय कुमार ने स्पष्ट किया है कि ये सभी वीडियो पूरी तरह नकली हैं और आधुनिक तकनीक आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (AI) के ज़रिए बनाए गए हैं।
अक्षय कुमार का आधिकारिक ट्वीट
अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर अपने बयान में लिखा:
🚨 हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ एआई-जनरेटेड वीडियो सामने आए हैं, जिनमें मुझे फ़िल्म ट्रेलर में महर्षि वाल्मीकि की भूमिका निभाते हुए दिखाया गया है। मैं साफ़ करना चाहता हूँ कि ये सभी वीडियो पूरी तरह नकली हैं और एआई से बनाए गए हैं।
और भी चिंताजनक बात यह है कि कुछ न्यूज़ चैनल्स ने इन्हें बिना किसी सत्यापन के ‘खबर’ की तरह दिखाना शुरू कर दिया।
आज के समय में जब मैनिपुलेटिव एआई के ज़रिए तेज़ी से भ्रामक कंटेंट बनाया जा रहा है, मेरी सभी मीडिया हाउसेज़ और पत्रकार मित्रों से अपील है कि कृपया किसी भी जानकारी को प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता की पुष्टि ज़रूर करें। 🙏
यह ट्वीट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया और लोगों ने अक्षय कुमार का समर्थन करते हुए मीडिया से अधिक जिम्मेदार रिपोर्टिंग की अपील की।
Also, Read: रिकॉर्ड क्लाउडबर्स्ट से कोलकाता में बाढ़, करंट लगने से पाँच की मौत, दुर्गा पूजा तैयारियाँ प्रभावित
एआई का दुरुपयोग और फेक कंटेंट का फैलाव
आज के डिजिटल युग में एआई तकनीक ने कई क्षेत्रों में क्रांति ला दी है, लेकिन इसका दुरुपयोग भी लगातार बढ़ रहा है। बिना किसी प्रमाण या सत्यापन के सिर्फ़ दिखावे के लिए बनाए गए ये वीडियो आम लोगों को गुमराह करने की क्षमता रखते हैं।
इन फेक वीडियोज़ के ज़रिए न केवल अक्षय कुमार की छवि के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, बल्कि एक महान ऋषि और सांस्कृतिक प्रतीक महर्षि वाल्मीकि की छवि को भी गलत संदर्भों में पेश किया जा रहा है। इससे समाज में भ्रम और अविश्वास फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
मीडिया चैनलों की गैर-ज़िम्मेदारी
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि कुछ समाचार चैनलों ने इन नकली वीडियोज़ को बिना किसी सत्यापन के ‘खबर’ के रूप में प्रसारित किया। पत्रकारिता का मूल सिद्धांत तथ्यों की पुष्टि करना होता है, लेकिन कई मीडिया संस्थानों ने इसे नजरअंदाज कर केवल सनसनी फैलाने को प्राथमिकता दी।
ऐसी प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है क्योंकि इससे फेक कंटेंट को वैधता मिलने लगती है और जनता के बीच भ्रम और गलतफहमी बढ़ती है।
Also, Read: बिग ब्रेकिंग – कर्नाटक हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के टिकट प्राइस कैप को ₹200 तक सीमित करने के फैसले पर लगाई रोक
सच्चाई की अपील
अक्षय कुमार ने स्पष्ट किया कि इन वीडियो का उनसे कोई लेना-देना नहीं है और यह सब भ्रामक AI-जनरेटेड कंटेंट है। उन्होंने मीडिया हाउसेज़, पत्रकारों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स से विनम्रतापूर्वक आग्रह किया कि भविष्य में किसी भी वीडियो या कंटेंट को प्रकाशित करने से पहले उसकी सत्यता की गहन जाँच ज़रूर करें।
जनता को गुमराह करने वाले कंटेंट के प्रसार को रोकना हर जिम्मेदार मीडिया संस्थान का कर्तव्य है।
गलत सूचना के युग में ज़िम्मेदारी
आज के समय में मैनिपुलेटिव एआई टूल्स का इस्तेमाल करके गलत सूचनाएँ, वीडियो और चित्र बड़ी तेजी से बनाए जा रहे हैं। ऐसे माहौल में यह और भी ज़रूरी हो जाता है कि हर सूचना स्रोत को कई स्तरों पर परखा जाए और केवल प्रमाणित तथ्यों के आधार पर ही रिपोर्टिंग की जाए।
पत्रकारिता केवल खबर दिखाने का माध्यम नहीं है, बल्कि सच्चाई तक पहुँचने और समाज को सही जानकारी उपलब्ध कराने का जिम्मेदार प्लेटफ़ॉर्म भी है।
Also, Read: ट्रंप का बड़ा फैसला: H-1B वीज़ा पर लगेगा सालाना 1 लाख डॉलर शुल्क, भारतीय आईटी सेक्टर को झटका
निष्कर्ष
अक्षय कुमार ने सभी से अपील की है कि इस तरह के भ्रामक कंटेंट को आगे न बढ़ाएँ और मीडिया संस्थान विशेष रूप से इस बात का ध्यान रखें कि उनकी रिपोर्टिंग सत्य और प्रमाणिक हो। फेक खबरों और फेक वीडियोज़ से लड़ना केवल तकनीक का ही नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
