भारत सरकार ने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते पर अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त की है। यह समझौता 17 सितंबर 2025 को रियाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मोहम्मद शहबाज शरीफ की राजकीय यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ।
इस समझौते के तहत दोनों देश इस बात पर सहमत हुए हैं कि यदि किसी एक पर हमला होता है, तो उसे दूसरे पर हमला माना जाएगा। इसके साथ ही रक्षा सहयोग, आतंकवाद-रोधी उपायों और क्षेत्रीय स्थिरता को और मजबूत करने पर भी सहमति बनी है।
यह समझौता ऐसे समय में आया है जब सऊदी अरब को अमेरिका की सुरक्षा प्रतिबद्धताओं को लेकर संदेह है और ग़ाज़ा व यमन में तनाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार के कारण यह समझौता रियाद को एक संभावित निवारक क्षमता (deterrent) प्रदान कर सकता है।
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सऊदी अरब की आधिकारिक प्रतिक्रियाएँ
सऊदी अरब के उपरक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान ने इस समझौते पर ट्वीट किया:
“सऊदी अरब और पाकिस्तान… किसी भी हमलावर के खिलाफ एकजुट मोर्चा… हमेशा और सदा के लिए।” 🇸🇦🇵🇰
सऊदी प्रेस एजेंसी (SPA) ने संयुक्त बयान साझा करते हुए कहा:
“पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की सऊदी अरब राजकीय यात्रा के बाद संयुक्त बयान जारी।”
👉 spa.gov.sa/en/w2399706
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सऊदी अरब और पाकिस्तान के आपसी रक्षा समझौते पर भारत का आधिकारिक बयान

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता श्री रंधीर जायसवाल ने इस विकास पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“हमने सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर की खबरें देखी हैं। सरकार इस विकास से अवगत थी, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे एक प्रबंध को औपचारिक रूप देता है और विचाराधीन था।
हम इस विकास के प्रभावों का अध्ययन करेंगे ताकि हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों, क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता की रक्षा की जा सके। भारत सरकार अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा और सभी क्षेत्रों में व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
भारत का यह वक्तव्य साफ करता है कि नई दिल्ली इस समझौते को केवल द्विपक्षीय नहीं बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक दृष्टिकोण से भी देख रही है। भारत की प्राथमिकता अपने राष्ट्रीय हितों और व्यापक सुरक्षा पर केंद्रित है।
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सऊदी अरब और पाकिस्तान रक्षा समझौते से जुड़े तथ्य
समझौते का विवरण
- सऊदी अरब और पाकिस्तान ने रक्षा, खुफिया सहयोग, आतंकवाद-रोधी अभियानों और रणनीतिक स्थिरता पर मिलकर काम करने की सहमति दी।
- दोनों देश यह मानेंगे कि किसी एक पर हमला दोनों पर हमला है।
क्षेत्रीय असर
- समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव ग़ाज़ा और यमन के मोर्चों पर चरम पर है।
- सऊदी अरब की चिंता यह है कि अमेरिका अब क्षेत्रीय सुरक्षा की गारंटी पहले जैसी मजबूती से नहीं दे रहा।
पाकिस्तान की भूमिका
- पाकिस्तान के परमाणु शस्त्रागार और सैन्य क्षमता ने इस समझौते को और अधिक रणनीतिक महत्व दिया है।
- इससे रियाद को संभावित रूप से एक परमाणु निवारक (nuclear deterrent) का अप्रत्यक्ष सहारा मिल सकता है।
भारत पर असर
- विशेषज्ञ मानते हैं कि यह समझौता खाड़ी क्षेत्र और दक्षिण एशिया में गठबंधनों को बदल सकता है।
- भारत को अपनी सुरक्षा रणनीति और विदेश नीति के विकल्पों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ सकता है।
निष्कर्ष
भारत सरकार की प्रतिक्रिया इस बात पर ज़ोर देती है कि नई दिल्ली इस समझौते के संभावित प्रभावों का गहराई से अध्ययन करेगी। भारत ने साफ किया है कि उसकी प्राथमिकता राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति को बनाए रखना है।
यह बयान न केवल भारत की सुरक्षा नीति की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि दक्षिण एशिया और खाड़ी क्षेत्र में किसी भी नई भू-राजनीतिक व्यवस्था को भारत निकटता से मॉनिटर करेगा।
