कोलकाता ने 23 सितंबर 2025 की रात दशकों की सबसे भीषण बारिश का सामना किया। देर रात से लेकर सुबह तक लगातार हुई भीषण बारिश ने महानगर को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। मौसम विभाग के अनुसार, महज कुछ ही घंटों में 327 मिलीमीटर तक वर्षा दर्ज की गई, जो पिछले कई दशकों में सबसे ज़्यादा है।
इस भारी बारिश की वजह थे तेज़ कन्वेक्टिव थंडरस्टॉर्म्स, जिन्होंने न सिर्फ़ सड़कों और गलियों को झील में बदल दिया बल्कि लाखों लोगों की ज़िंदगी को ठप कर दिया। लोग घरों और दफ्तरों में फंसे रह गए, गाड़ियाँ पानी में डूबकर बेकार हो गईं और बिजली कटने से अंधेरे में शहर ठहर सा गया। सबसे बड़ी चिंता इस बात की रही कि यह आपदा उस समय आई जब शहर दुर्गा पूजा की तैयारियों में रंगा हुआ था।
बाढ़ से तबाही
इस क्लाउडबर्स्ट जैसी बारिश ने कोलकाता की जल निकासी प्रणाली की पोल खोल दी। महज़ कुछ ही घंटों में सड़कों पर घुटनों से लेकर कमर तक पानी भर गया। कई इलाकों में लोग अपने घरों से निकल भी नहीं पाए क्योंकि आसपास की गलियाँ पानी से लबालब थीं। कुछ जगहों पर तो हालात इतने बिगड़ गए कि पानी मकानों के अंदर तक घुस गया, जिससे लोगों का सामान, फर्नीचर और यहाँ तक कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तक खराब हो गए। दुकानदारों और छोटे व्यापारियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि उनका माल पानी में भीगकर नष्ट हो गया।
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करंट से मौतें
बारिश और जलभराव के बीच शहर में सबसे भयावह घटनाएँ सामने आईं जब कम से कम पाँच लोगों की मौत करंट लगने से हो गई। यह हादसे उन इलाकों में हुए जहाँ खुले बिजली के तार और ट्रांसफार्मर पानी में डूब गए थे। गीले इलाकों में फैले करंट ने लोगों के लिए हर कदम को ख़तरनाक बना दिया। स्थानीय प्रशासन ने तात्कालिक रूप से चेतावनी जारी करते हुए निवासियों से अपील की कि वे जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें और बिजली उपकरणों का इस्तेमाल न करें। लेकिन तब तक कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके थे। इन मौतों ने इस आपदा की गंभीरता और प्रशासनिक लापरवाही दोनों को उजागर कर दिया।
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यातायात ठप
भारी बारिश और जलभराव ने कोलकाता की यातायात व्यवस्था को पूरी तरह से अपंग कर दिया। शहर की धड़कन कही जाने वाली मेट्रो सेवाएँ रोक दी गईं, कई लोकल ट्रेनें घंटों लेट या पूरी तरह से कैंसिल हो गईं। बसें, टैक्सियाँ और निजी वाहन पानी में डूबकर जगह-जगह फँस गए। सड़कों पर यात्रियों की भीड़ लग गई जो घंटों तक इंतज़ार करते रहे लेकिन कोई साधन उपलब्ध नहीं हो पाया। हजारों यात्री रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों पर फंसे रहे। एयरपोर्ट पर भी विमानों की आवाजाही बाधित हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय और घरेलू यात्रियों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।
दुर्गा पूजा पर असर
कोलकाता की पहचान मानी जाने वाली दुर्गा पूजा की तैयारियों को इस बाढ़ ने करारा झटका दिया। पूरे शहर में लगाए जा रहे शानदार पंडाल पानी में डूब गए, मूर्तियों को नुकसान पहुँचा और सजावट पूरी तरह बर्बाद हो गई। जिन कलाकारों और कारीगरों ने महीनों मेहनत की थी, उनका काम चंद घंटों की बारिश में नष्ट हो गया। आयोजकों को डर है कि इस बार का महोत्सव अधूरा रह सकता है या उतनी भव्यता से नहीं हो पाएगा जितनी उम्मीद थी। पंडाल समितियों का कहना है कि अब समय बहुत कम बचा है और इतनी बड़ी क्षति की भरपाई करना लगभग असंभव है।
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प्रशासन की तैयारी
स्थिति को संभालने के लिए राज्य सरकार और नगर निगम ने आपदा प्रबंधन दलों को तैनात किया। पंपों की मदद से पानी निकालने का काम शुरू किया गया, हालांकि भारी बारिश के कारण प्रयासों का असर धीमा रहा। बिजली विभाग ने कई संवेदनशील इलाकों में बिजली सप्लाई काट दी ताकि और हादसे न हों। एनडीआरएफ और स्थानीय पुलिस के जवान नावों और रस्सियों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचा रहे हैं। लेकिन लगातार बारिश ने राहत कार्यों को बेहद कठिन बना दिया है।
मौसम विभाग की चेतावनी
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि 26 सितंबर तक और भी भारी बारिश हो सकती है। यानी कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों को अभी और कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे गैर-जरूरी काम के लिए घर से बाहर न निकलें और सुरक्षित स्थानों पर रहें। साथ ही, नगर निगम ने मेडिकल टीमों को भी अलर्ट पर रखा है ताकि जलजनित बीमारियों और महामारी की आशंका से निपटा जा सके।
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यह आपदा केवल बारिश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कोलकाता की कमज़ोर बुनियादी संरचना, जल निकासी तंत्र की नाकामी और प्रशासनिक तैयारी की कमी को भी उजागर करती है। सबसे बड़ी चोट शहर की सांस्कृतिक धड़कन दुर्गा पूजा को लगी है, जिसकी चमक इस बार बाढ़ की मार से फीकी पड़ सकती है।
