अगर आप अपना खुद का छोटा बिजनेस शुरू करना चाहते हैं लेकिन पूंजी की कमी आड़े आ रही है, तो केंद्र सरकार की PMEGP Loan योजना आपके लिए काफी काम की साबित हो सकती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, जिसे संक्षेप में PMEGP कहा जाता है, एक क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना है जिसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए शुरू किया था।
इस योजना की खासियत यह है कि इसमें सिर्फ बैंक लोन नहीं मिलता, बल्कि सरकार की तरफ से एक अच्छी खासी सब्सिडी भी दी जाती है, जिसे मार्जिन मनी कहा जाता है। यानी अगर आपका प्रोजेक्ट मंजूर हो जाता है, तो आपको पूरी रकम अपनी जेब से चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती। इस लेख में हम PMEGP लोन योजना के बारे में हर जरूरी बात विस्तार से समझेंगे, जिसमें इसका उद्देश्य, सब्सिडी की संरचना, पात्रता, जरूरी दस्तावेज और आवेदन की पूरी प्रक्रिया शामिल है।
PMEGP योजना है क्या और इसे चलाता कौन है

PMEGP दरअसल दो पुरानी योजनाओं, प्रधानमंत्री रोजगार योजना और ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम, को मिलाकर बनाई गई थी। सरकार ने साल 2021-22 से 2025-26 तक पांच साल के लिए इस योजना को जारी रखने की मंजूरी दी थी, और अब यह योजना 2026-27 के लिए भी बजट आवंटन के साथ सक्रिय रूप से चल रही है। बीच में कुछ समय के लिए ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी दिक्कतों के चलते आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हुई थी, जिसकी वजह से कई लोगों में योजना बंद होने की गलतफहमी भी बनी, लेकिन योजना पूरी तरह सक्रिय है और नए आवेदन लगातार स्वीकार किए जा रहे हैं।
इस योजना का संचालन तीन अलग-अलग स्तर पर होता है। राष्ट्रीय स्तर पर पूरी योजना का प्रबंधन खादी और ग्रामोद्योग आयोग यानी KVIC करता है। राज्य स्तर पर KVIB ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि शहरी और मिश्रित क्षेत्रों का काम जिला उद्योग केंद्र यानी DIC देखता है। यही तीनों संस्थाएं मिलकर तय करती हैं कि किसी आवेदक का प्रोजेक्ट किस श्रेणी में आएगा और उसे कहां से मंजूरी मिलेगी।
PMEGP योजना का मकसद क्या है
अगर हम इस योजना को गहराई से समझें, तो इसके पीछे चार बड़े मकसद हैं:
- ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नए बिजनेस और प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए लोन देना, ताकि रोजगार के नए अवसर बन सकें
- पारंपरिक कारीगरों और बेरोजगार युवाओं को एक साथ लाकर स्वरोजगार के रास्ते खोलना
- गांव में रहने वाले लोगों को रोजगार की तलाश में शहरों की तरफ पलायन करने से रोकना, खासकर उन कारीगरों के लिए जो सीजनल काम खत्म होने के बाद बाकी साल बेरोजगार बैठे रहते हैं
- कारीगरों की कमाने की क्षमता बढ़ाना और ग्रामीण-शहरी रोजगार की वृद्धि दर को तेज करना
संक्षिप्त विवरण एक नजर में
आगे बढ़ने से पहले नीचे दी गई तालिका में PMEGP योजना की मुख्य बातें एक साथ देखी जा सकती हैं।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) |
| संचालक मंत्रालय | सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय |
| कार्यान्वयन एजेंसी | KVIC (राष्ट्रीय), KVIB (ग्रामीण), DIC (शहरी) |
| अधिकतम प्रोजेक्ट लागत, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट | 50 लाख रुपये |
| अधिकतम प्रोजेक्ट लागत, सर्विस यूनिट | 20 लाख रुपये |
| सब्सिडी दर | 15 प्रतिशत से 35 प्रतिशत |
| न्यूनतम आयु | 18 वर्ष |
| न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता | कुछ प्रोजेक्ट लागत सीमा से ऊपर के लिए 8वीं पास जरूरी |
| आवेदन का माध्यम | ऑनलाइन (pmegp.msme.gov.in पोर्टल) और ऑफलाइन दोनों |
| आवेदन की अंतिम तिथि | कोई निश्चित तिथि नहीं, पूरे साल आवेदन स्वीकार |
| आधिकारिक वेबसाइट | pmegp.msme.gov.in (MSME मंत्रालय का आधिकारिक पोर्टल) |
| हेल्पलाइन नंबर | 07526000333/07526000555 (1800 3000 0034 ) |
| KVIC फोन नंबर | 022-26711017 |
| ईमेल सपोर्ट | pmegp.kvic@gov.in |
PMEGP जरूरी संपर्क नंबर और मदद के स्रोत
अगर आवेदन करते समय या प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की दिक्कत आए, तो नीचे दी गई तालिका में मौजूद आधिकारिक संपर्क माध्यमों से मदद ली जा सकती है।
| संपर्क माध्यम | विवरण |
|---|---|
| PMEGP टोल फ्री हेल्पलाइन | 07526000333/07526000555 (1800 3000 0034) |
| KVIC फोन नंबर | 022-26711017 |
| ईमेल सपोर्ट | pmegp.kvic@gov.in |
| आधिकारिक पोर्टल | pmegp.msme.gov.in |
| शिकायत दर्ज करने की सुविधा | pmegp.msme.gov.in पोर्टल पर मौजूद Grievances सेक्शन |
| राज्य/जोन-वार हेल्पडेस्क नंबर | pmegp.msme.gov.in/Home/HelpDesk पेज पर Central, East, North, NorthEast, South और West जोन के हिसाब से उपलब्ध |
| नजदीकी कार्यान्वयन एजेंसी | pmegp.msme.gov.in/Home/NodalOfficeList पेज से जिला स्तर के KVIC, KVIB या DIC कार्यालय का पता लगाया जा सकता है |
| बैंक नोडल अधिकारी सूची | pmegp.msme.gov.in/Home/BankNodalList पेज पर उपलब्ध |
राज्य के हिसाब से अलग-अलग हेल्पडेस्क नंबर और ईमेल आईडी समय-समय पर अपडेट होते रहते हैं, इसलिए अपने राज्य का सटीक नंबर जानने के लिए ऊपर बताए गए Helpdesk पेज पर जाकर जोन के अनुसार सूची जरूर देख लें।
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PMEGP के तहत कितना लोन और सब्सिडी मिलती है
PMEGP लोन में पूरा पैसा बैंक से नहीं आता, बल्कि इसे तीन हिस्सों में बांटा जाता है। सबसे पहले आवेदक को खुद अपनी तरफ से प्रोजेक्ट लागत का एक हिस्सा लगाना होता है, इसके बाद सरकार सब्सिडी के रूप में एक हिस्सा देती है, और बाकी की रकम बैंक टर्म लोन के रूप में मुहैया कराता है। इसी टर्म लोन को आमतौर पर PMEGP लोन कहा जाता है।
सब्सिडी और लाभार्थी के योगदान की पूरी संरचना नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है।
| श्रेणी | लाभार्थी का योगदान | सब्सिडी (शहरी) | सब्सिडी (ग्रामीण) |
|---|---|---|---|
| सामान्य वर्ग | 10 प्रतिशत | 15 प्रतिशत | 25 प्रतिशत |
| विशेष वर्ग (SC/ST/OBC, अल्पसंख्यक, महिला, पूर्व सैनिक, दिव्यांग, पहाड़ी और सीमावर्ती इलाके) | 5 प्रतिशत | 25 प्रतिशत | 35 प्रतिशत |
यहां एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि विशेष वर्ग में आने वाले आवेदकों को दोनों तरफ से फायदा मिलता है, उन्हें अपनी जेब से कम पैसा लगाना पड़ता है और सब्सिडी भी ज्यादा मिलती है। आमतौर पर बैंक लोन की राशि कुल प्रोजेक्ट लागत की 60 से 75 प्रतिशत के बीच होती है, हालांकि दिशानिर्देशों के अनुसार बैंक सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को प्रोजेक्ट लागत का 90 प्रतिशत तक और विशेष वर्ग के लाभार्थियों को 95 प्रतिशत तक फाइनेंस कर सकते हैं।
मार्जिन मनी के रूप में मिलने वाली यह सब्सिडी सीधे बैंक को दी जाती है, जिसका लॉक-इन पीरियड तीन साल का होता है। इस अवधि के बाद ही यह पैसा आवेदक के लोन खाते में समायोजित होता है, और इसके लिए जरूरी है कि उसने बैंक के दिशानिर्देशों के मुताबिक फंड का सही इस्तेमाल किया हो।
PMEGP के तहत विस्तार के लिए दूसरा लोन भी मिलता है
जिन लोगों ने पहले से PMEGP, REGP या मुद्रा योजना के तहत अपना बिजनेस शुरू कर रखा है और अब उसे बड़ा करना चाहते हैं, उनके लिए सरकार ने दूसरे लोन का भी प्रावधान रखा है, जिसे अपग्रेडेशन लोन कहा जाता है। इसकी सीमा और सब्सिडी क्षेत्र के हिसाब से अलग-अलग तय की गई है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में विस्तार के लिए अधिकतम प्रोजेक्ट लागत 1 करोड़ रुपये तक मंजूर होती है, जिस पर अधिकतम 15 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है। पूर्वोत्तर राज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों में यह सब्सिडी सीमा बढ़कर 20 लाख रुपये तक हो जाती है।
वहीं सर्विस और बिजनेस सेक्टर में विस्तार के लिए अधिकतम प्रोजेक्ट लागत 25 लाख रुपये तक मंजूर होती है, जिस पर अधिकतम 3.75 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिलती है, जो पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़कर 5 लाख रुपये तक हो जाती है। अगर प्रोजेक्ट की कुल लागत इन सीमाओं से ज्यादा हो, तो बाकी रकम बैंक बिना किसी सरकारी सब्सिडी के लोन के रूप में देता है।
दूसरे लोन के लिए पात्रता की शर्तें भी अलग से तय हैं। इसके लिए जरूरी है कि आवेदक की मौजूदा यूनिट का पहला लोन तय समय सीमा में पूरी तरह चुकाया जा चुका हो और उसका मार्जिन मनी दावा पहले ही समायोजित हो चुका हो। इसके अलावा यूनिट पिछले तीन साल से लगातार मुनाफे में चल रही होनी चाहिए।
आवेदक चाहे तो उसी बैंक में आवेदन कर सकता है जिसने पहला लोन दिया था, या किसी दूसरे बैंक में भी आवेदन कर सकता है जो दूसरा लोन देने को तैयार हो। इसके लिए भी उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। यह सुविधा केवल मौजूदा और सफलतापूर्वक चल रहे उद्यमों के विस्तार के लिए है, बिल्कुल नए बिजनेस के लिए नहीं।
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कौन उठा सकता है इस योजना का फायदा
PMEGP लोन व्यक्तिगत आवेदकों के साथ-साथ कुछ खास तरह के संगठनों को भी दिया जाता है, बशर्ते वे तय शर्तें पूरी करते हों।
व्यक्तिगत आवेदकों के लिए पात्रता:
- आवेदक भारत का नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए
- अगर मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की प्रोजेक्ट लागत 10 लाख रुपये से ज्यादा है, या सर्विस/बिजनेस यूनिट की लागत 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो आवेदक का कम से कम 8वीं पास होना अनिवार्य है। इससे कम लागत वाले प्रोजेक्ट के लिए कोई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तय नहीं है
- आवेदक को केवल नई परियोजना ही शुरू करनी होगी, पहले से चल रहे बिजनेस के लिए यह लोन नहीं मिलता
- इस लोन के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा तय नहीं है, हालांकि बैंक अपने स्तर पर कुछ शर्तें रख सकते हैं
- आवेदक की परिवारिक आय की कोई सीमा तय नहीं है
- एक परिवार से सिर्फ एक ही व्यक्ति इस योजना के तहत नई परियोजना के लिए सहायता ले सकता है, यहां परिवार में स्वयं, पति/पत्नी और अविवाहित बच्चे शामिल माने जाते हैं
- PMEGP के तहत स्थापित होने वाली हर नई यूनिट को फिजिकल वेरिफिकेशन और मार्जिन मनी के समायोजन से पहले उद्यम पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है
- सिर्फ पूंजीगत खर्च वाली परियोजनाएं ही इस योजना के तहत वित्तपोषण के लिए पात्र हैं, जिन प्रोजेक्ट में कोई पूंजीगत व्यय नहीं है वे पात्र नहीं मानी जातीं
- प्रोजेक्ट लागत में जमीन की कीमत शामिल नहीं की जा सकती, हालांकि बने-बनाए शेड या किराए के वर्कशॉप की लागत को अधिकतम तीन साल तक की सीमा तक प्रोजेक्ट लागत में शामिल किया जा सकता है
संस्थागत आवेदकों के लिए पात्रता:
- स्वयं सहायता समूह
- चैरिटेबल ट्रस्ट
- सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत रजिस्टर्ड सोसाइटी
- प्रोडक्शन को-ऑपरेटिव सोसाइटी
एक बहुत जरूरी बात यह भी है कि जिस व्यवसाय को पहले से किसी भी केंद्र या राज्य सरकार की योजना के तहत सब्सिडी मिल चुकी है, वह PMEGP के तहत दोबारा आवेदन नहीं कर सकता। इसके अलावा कुछ गतिविधियां इस योजना की प्रतिबंधित सूची में आती हैं, जैसे मांस प्रसंस्करण, शराब और तंबाकू उत्पादन, तय मोटाई से पतले प्लास्टिक कैरी बैग बनाना, और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने वाली गतिविधियां। शुद्ध रूप से कृषि गतिविधियों को भी इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।
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PMEGP आवेदन के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए
आवेदन शुरू करने से पहले सभी जरूरी कागजात तैयार रखना बेहतर रहता है, ताकि बीच में कोई अड़चन न आए। PMEGP लोन के लिए सामान्य तौर पर इन दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है:
- पासपोर्ट साइज फोटो के साथ विधिवत भरा हुआ आवेदन पत्र
- आधार कार्ड, जो ओटीपी प्रमाणीकरण के लिए अनिवार्य है
- पैन कार्ड, पहचान और वित्तीय रिकॉर्ड के लिए जरूरी
- 8वीं कक्षा पास का प्रमाण पत्र
- पहचान और पते का प्रमाण
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट, जिसमें लागत, मशीनरी और पूरी कार्ययोजना का ब्योरा हो
- बैंक खाते का विवरण, जो आवेदक के नाम पर सक्रिय हो
- विशेष श्रेणी का प्रमाण पत्र, यदि लागू हो
- उद्यमिता विकास कार्यक्रम यानी EDP प्रशिक्षण का प्रमाण पत्र
- SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक, पूर्व सैनिक या दिव्यांग श्रेणी का प्रमाण पत्र, यदि लागू हो
- संस्था पंजीकरण पत्र, अगर आवेदन स्वयं सहायता समूह, ट्रस्ट या सोसाइटी की ओर से किया जा रहा हो
- शैक्षणिक और तकनीकी कोर्स का प्रमाण पत्र, अगर कोई हो
इनमें आधार कार्ड की भूमिका सबसे अहम है, क्योंकि पोर्टल पर पहचान का पूरा सत्यापन ज्यादातर मामलों में मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी के जरिए ही होता है, इसलिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर हमेशा सक्रिय रखना चाहिए। अगर किसी वजह से आवेदक के पास आधार नंबर उपलब्ध नहीं है, तो व्यक्तिगत आवेदक अपना पैन कार्ड या संस्था अपना चालू बैंक खाता नंबर विकल्प के तौर पर प्रस्तुत कर सकती है।
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PMEGP के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें
PMEGP लोन के लिए आवेदन करने का सबसे आसान तरीका इसके आधिकारिक पोर्टल pmegp.msme.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना है। यह पोर्टल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत संचालित होता है, जबकि KVIC, KVIB और DIC कार्यान्वयन एजेंसी के तौर पर काम करते हैं। कुछ जगहों पर पुराना पोर्टल kviconline.gov.in/pmegpeportal भी संदर्भित किया जाता है, लेकिन आवेदन के लिए वर्तमान आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करना ही सही रहता है। आवेदन के चरण इस प्रकार हैं:
- सबसे पहले PMEGP के आधिकारिक पोर्टल pmegp.msme.gov.in पर जाएं
- अपने बिजनेस की संरचना के हिसाब से पर्सनल या नॉन-पर्सनल आवेदन फॉर्म का चुनाव करें
- आधार कार्ड की जानकारी दर्ज करें और सत्यापन के लिए सहमति दें, इसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आएगा
- नाम, पता, शिक्षा और श्रेणी जैसी सभी पर्सनल जानकारी भरें, और ध्यान रखें कि यह जानकारी आधार में दर्ज विवरण से पूरी तरह मेल खाती हो
- व्यावसायिक गतिविधि, अनुमानित प्रोजेक्ट लागत, क्षेत्र का प्रकार और अपेक्षित परिचालन जैसी परियोजना संबंधी जानकारी भरें
- ड्रॉपडाउन सूची में से अपने पसंदीदा बैंक का चुनाव करें, जो अनुमोदन के बाद लोन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा
- अपने क्षेत्र और व्यवसाय के प्रकार के अनुसार KVIC, KVIB या DIC में से कार्यान्वयन एजेंसी चुनें
- सभी जरूरी दस्तावेज स्कैन करके तय प्रारूप में पोर्टल पर अपलोड करें
- सारी जानकारी की एक बार फिर जांच करें, क्योंकि सबमिट करने के बाद फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा
- आवेदन को फाइनल सबमिट करने के बाद, आपकी आईडी और पासवर्ड आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे जाएंगे
कई बार ऑनलाइन आवेदन जमा करने के बाद भी संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी के निर्देश पर आवेदकों को अपने मूल दस्तावेजों के साथ आवेदन की एक प्रिंट कॉपी संबंधित KVIC, KVIB या DIC कार्यालय में भौतिक सत्यापन के लिए जमा करनी पड़ सकती है।
PMEGP के लिए ऑफलाइन आवेदन का विकल्प भी मौजूद है
जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज महसूस नहीं करते, उनके लिए ऑफलाइन आवेदन का रास्ता भी खुला है। इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट से PMEGP आवेदन पत्र का पीडीएफ डाउनलोड किया जा सकता है। फॉर्म में जरूरी जानकारी भरने के बाद इसे ड्राफ्ट के तौर पर सुरक्षित रखें, फिर इसका प्रिंटआउट निकालकर नजदीकी बैंक शाखा में जमा कर दें। इसके बाद संबंधित बैंक द्वारा जरूरी सभी औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं।
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PMEGP Loan आवेदन के बाद क्या होता है
आवेदन जमा करने के बाद यह प्रक्रिया एक ही दिन में पूरी नहीं होती, इसमें कई चरण होते हैं। आवेदन मिलने के 48 घंटे यानी 2 कार्य दिवसों के भीतर KVIC, राज्य KVIB और DIC के नोडल अधिकारी आवेदक से फोन या व्यक्तिगत मुलाकात के जरिए संपर्क करते हैं और प्रारंभिक जांच के लिए आवेदन की प्राप्ति की पुष्टि करते हैं। इसके बाद आवेदन जिला स्तर की टास्क फोर्स कमेटी से होते हुए संबंधित बैंक के पास सिफारिश के लिए भेजा जाता है।
बैंक को आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर उसे या तो मंजूर करना होता है या अस्वीकार करना होता है। सामान्य तौर पर पूरी प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन से लेकर लोन स्वीकृति तक, लगभग 60 दिनों में पूरी हो जाती है, हालांकि व्यावहारिक तौर पर यह समय कार्यान्वयन एजेंसी और बैंक के कार्यभार के आधार पर घट-बढ़ सकता है।
मंजूरी मिलने के बाद चुने गए आवेदकों को उद्यमिता विकास कार्यक्रम यानी EDP प्रशिक्षण में हिस्सा लेना जरूरी होता है। यह प्रशिक्षण आमतौर पर 10 से 15 दिनों तक चलता है और इसका आयोजन KVIC या राज्य के DIC कार्यालय करते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि आवेदकों को लोन की मंजूरी का इंतजार किए बिना भी, आवेदन जमा करने के बाद कभी भी अपने राज्य के KVIC कार्यालय से संपर्क करके और तय शुल्क भरकर EDP प्रशिक्षण पहले से पूरा किया जा सकता है।
इसमें बुनियादी बिजनेस प्रबंधन, हिसाब-किताब रखने और परिचालन योजना बनाने जैसी बातें सिखाई जाती हैं। यह ध्यान रखने वाली बात है कि जब तक EDP प्रशिक्षण पूरा नहीं होता, बैंक फंड जारी नहीं करते। कई आवेदक इस चरण को हल्के में ले लेते हैं और फिर मंजूरी मिलने के बावजूद पैसा मिलने में देरी झेलते हैं।
लोन मंजूर होने के बाद स्वीकृति की सूचना मिलने के 10 कार्य दिवसों के भीतर आवेदक को अपना खुद का योगदान और EDP प्रशिक्षण प्रमाण पत्र की प्रति फाइनेंस करने वाले बैंक में जमा करनी होती है। इसके बाद बैंक लोन की पहली किस्त जारी करता है और सब्सिडी का दावा KVIC के ऑनलाइन पोर्टल के जरिए जमा करता है।
सब्सिडी की राशि लाभार्थी के नाम पर तीन साल की सावधि जमा रसीद यानी टर्म डिपॉजिट रिसिप्ट (TDR) के रूप में बैंक में रखी जाती है, इस पर न तो कोई ब्याज दिया जाता है और न ही लोन की उतनी राशि पर ब्याज लिया जाता है। तीन साल की इस लॉक-इन अवधि के सफलतापूर्वक पूरा होने पर ही यह सब्सिडी राशि लोन में समायोजित होती है।
PMEGP Loan आवेदन की स्थिति कैसे ट्रैक करें
आवेदन जमा करने के बाद उसकी स्थिति जानने के लिए भी पूरी सुविधा दी गई है।
- PMEGP के आधिकारिक पोर्टल pmegp.msme.gov.in पर जाएं
- रजिस्टर्ड आवेदकों के लिए बने लॉगिन फॉर्म पर क्लिक करें
- अपनी आईडी और पासवर्ड दर्ज करके लॉगिन करें
- अपनी आवेदन स्थिति ट्रैक करने के लिए व्यू स्टेटस पर क्लिक करें
आवेदन की स्थिति आमतौर पर इन चरणों से होकर गुजरती है, जमा किया गया, जांच के दायरे में, बैंक को अनुशंसित, स्वीकृत और अंत में संवितरित। इसके अलावा UMANG ऐप के जरिए भी मोबाइल पर आवेदन की स्थिति देखी जा सकती है, जो उन लोगों के लिए सुविधाजनक है जो बार-बार कंप्यूटर पर पोर्टल खोलने के बजाय मोबाइल से ही सब कुछ ट्रैक करना चाहते हैं।
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PMEGP Loan आवेदन रिजेक्ट होने के आम कारण
कई बार अच्छा प्रोजेक्ट होने के बावजूद भी छोटी-छोटी गलतियों की वजह से आवेदन रिजेक्ट हो जाता है। इनसे बचने के लिए यह बातें ध्यान में रखनी चाहिए:
- अधूरे दस्तावेज जमा करना सबसे आम कारण है, इसलिए सभी जरूरी दस्तावेज स्पष्ट रूप से जमा करें
- आधार कार्ड और आवेदन फॉर्म के विवरण में किसी तरह की विसंगति न रखें
- प्रोजेक्ट की लागत उन सीमाओं के अंदर रखें जो योजना के तहत मूल्यांकन मानदंडों से मेल खाती हों
- ऐसी गतिविधि के लिए आवेदन न करें जो योजना के तहत प्रतिबंधित सूची में आती हो, आवेदन करने से पहले पात्र व्यावसायिक श्रेणियों की सूची जरूर देख लें
- पहले से चल रहे व्यवसाय को नई परियोजना के तौर पर दिखाकर आवेदन न करें
किन-किन क्षेत्रों में मिल सकता है PMEGP लोन
PMEGP योजना के तहत कई तरह के व्यावसायिक क्षेत्रों में प्रोजेक्ट शुरू किए जा सकते हैं, जिनमें एग्रो बेस्ड फूड प्रोसेसिंग, डेयरी और दूध उत्पाद, कोल्ड स्टोरेज, टेक्सटाइल और परिधान, इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरण, फॉरेस्ट इंडस्ट्री, हॉर्टीकल्चर और ऑर्गेनिक फार्मिंग, कागज और संबंधित उत्पाद, प्लास्टिक उत्पाद, सर्विस सेक्टर और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं। यही वजह है कि यह योजना केवल किसी एक तरह के व्यवसाय तक सीमित नहीं, बल्कि लगभग हर क्षेत्र के छोटे उद्यमियों के लिए उपयोगी साबित होती है।
हालांकि शुद्ध ट्रेडिंग यानी खरीद-बिक्री वाली गतिविधियों को आमतौर पर इस योजना से बाहर रखा गया है, सिवाय कुछ खास मामलों के, जैसे खादी और ग्रामोद्योग उत्पाद बेचने वाले रिटेल आउटलेट, या मैन्युफैक्चरिंग/सर्विस सुविधा से जुड़े रिटेल आउटलेट। पर्यटकों या आम जनता के परिवहन के लिए कैब, वैन, बोट जैसी ट्रांसपोर्ट गतिविधियों को भी सीमित शर्तों के साथ अनुमति दी जाती है। इसके अलावा मांस प्रसंस्करण, शराब और तंबाकू उत्पादन जैसी गतिविधियां योजना की प्रतिबंधित सूची यानी निगेटिव लिस्ट में आती हैं। आवेदन करने से पहले पूरी निगेटिव लिस्ट आधिकारिक दिशानिर्देशों में जरूर देख लेनी चाहिए।
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FAQs
1. PMEGP लोन के तहत अधिकतम कितनी प्रोजेक्ट लागत मंजूर होती है?
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अधिकतम 50 लाख रुपये और सर्विस यूनिट के लिए अधिकतम 20 लाख रुपये तक की प्रोजेक्ट लागत मंजूर की जाती है।
2. क्या PMEGP लोन लेने के लिए कोलैटरल देना पड़ता है?
RBI के दिशानिर्देशों के अनुसार 10 लाख रुपये तक की प्रोजेक्ट लागत के लिए किसी कोलैटरल या सिक्योरिटी की जरूरत नहीं होती। इससे ज्यादा लागत वाली परियोजनाओं के लिए बैंक CGTMSE की कोलैटरल गारंटी सुविधा का इस्तेमाल करके भी लोन बिना कोलैटरल के मंजूर कर सकते हैं, जिसके तहत कोलैटरल-फ्री कवरेज मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार काफी बड़ी परियोजनाओं तक बढ़ाया जा सकता है।
3. PMEGP के लिए आवेदन की अंतिम तारीख क्या है?
इस योजना की कोई निश्चित अंतिम तारीख नहीं है, KVIC पोर्टल पर पूरे साल आवेदन स्वीकार किए जाते हैं, हालांकि आवेदन बैचों में प्रोसेस होते हैं और उपलब्ध लक्ष्य पर निर्भर करते हैं।
4. क्या पहले से चल रहा बिजनेस PMEGP के लिए आवेदन कर सकता है?
नहीं, PMEGP केवल नए बिजनेस शुरू करने वालों के लिए है, मौजूदा व्यवसाय इसके लिए पात्र नहीं होते।
5. PMEGP सब्सिडी कितनी मिलती है?
सामान्य वर्ग को शहरी क्षेत्रों में 15 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है। विशेष वर्ग को शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 35 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलती है।
6. PMEGP लोन मिलने में कितना समय लगता है?
सामान्य तौर पर आवेदन से लेकर लोन स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया लगभग 60 दिनों में पूरी हो जाती है। बैंक को जिला टास्क फोर्स से सिफारिश मिलने के 30 दिनों के भीतर आवेदन पर फैसला लेना होता है। हालांकि EDP प्रशिक्षण पूरा होने और अन्य औपचारिकताओं के आधार पर वास्तविक समय इससे अलग भी हो सकता है।
7. लोन चुकाने की अवधि कितनी है?
PMEGP लोन की चुकौती अवधि आमतौर पर 3 से 7 साल के बीच होती है, जिसमें बैंक द्वारा तय की गई शुरुआती मोहलत अवधि यानी मोरेटोरियम पीरियड भी शामिल होता है।
8. क्या आधार कार्ड अनिवार्य है?
ज्यादातर मामलों में आधार कार्ड जरूरी है क्योंकि पहचान सत्यापन ओटीपी के जरिए ही होता है, इसलिए आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर सक्रिय होना चाहिए। हालांकि अगर आवेदक के पास आधार उपलब्ध नहीं है, तो पैन कार्ड या चालू बैंक खाता नंबर भी विकल्प के तौर पर दिया जा सकता है।
9. क्या मोबाइल फोन से PMEGP के लिए आवेदन किया जा सकता है?
हां, UMANG ऐप के जरिए मोबाइल से भी आवेदन किया जा सकता है और KVIC पोर्टल ब्राउजर के जरिए मोबाइल पर भी खोला जा सकता है।
10. PMEGP लोन के लिए कहां आवेदन करें?
आवेदन PMEGP के आधिकारिक पोर्टल pmegp.msme.gov.in पर ऑनलाइन किया जा सकता है, या फिर आवेदन पत्र डाउनलोड करके ऑफलाइन नजदीकी बैंक शाखा या कार्यान्वयन एजेंसी के कार्यालय में भी जमा किया जा सकता है।
निष्कर्ष
PMEGP लोन योजना उन लोगों के लिए एक भरोसेमंद रास्ता है जो अपना खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं लेकिन शुरुआती पूंजी की कमी की वजह से हिचकिचाते हैं। इसमें सिर्फ बैंक से लोन ही नहीं मिलता, बल्कि सरकार की तरफ से 15 से 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे प्रोजेक्ट पर वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हो जाता है।
जो लोग इस योजना की पात्रता पूरी करते हैं, उन्हें अपने प्रोजेक्ट की एक स्पष्ट योजना बनाकर, सभी जरूरी दस्तावेज तैयार करके PMEGP के आधिकारिक पोर्टल pmegp.msme.gov.in पर आवेदन कर देना चाहिए। साथ ही यह भी ध्यान रखें कि आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर सक्रिय हो और सभी जानकारी सही-सही भरी गई हो, ताकि आवेदन बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके। सही तरीके से किया गया आवेदन ही PMEGP लोन योजना का पूरा फायदा दिला सकता है और आपके सपनों के बिजनेस को हकीकत में बदल सकता है।
